पश्चिमी सिंहभूम के सोनुआ क्षेत्र में भाकपा माओवादियों ने की पोस्टरबाजी की है।

आज सुबह सोनुआ-लोंजो ग्रामीण मुख्य सड़क में जगह-जगह लगाया भाकपा माओवादी के बैनर और पोस्टर लगाया हुआ पाया गया। बैनर और पोस्टरों में 2 से 8 दिसंबर तक पीएलजीए का 23वीं वर्षगाँठ मनाने का किया आह्वान किया गया है। इसके साथ एक बैनर में भाकपा भाकपा माओवादियों ने लिखा है कि कोल्हान वन क्षेत्र में सीआरपीएफ का एफओबी कैम्प जब तक रहेगा तब तक माओवादियों के बुबी ट्रप भी रहेगा। ईधर सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुँचकर बैनर-पोस्टरों को जब्त कर लिया।

सीआईआई और यंग इंडियनस जमशेदपुर संस्था की ओर से सोमवार को साकची स्थित रेड क्रॉस भवन में एकदिवसीय नेत्र जांच शिविर लगाया गया. इस शिविर की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ वाहन चालकों के आंखों की जांच की गई. शिविर सुबह 10 बजे शुरू हुआ जो दोपहर 02 बजे तक चला. इसमें ऑटो चालक, कार चालक के साथ साथ अन्य भारी वाहनों के चालकों ने पहुंचकर अपनी आंखों की जांच करवाई. त्रिनेत्रम आई हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने शिविर में आए लोगों के आंखों की जांच की. आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि चालकों के आंखों की जांच के बाद जिम मोतियाबिंद पाए जाएंगे उनका ऑपरेशन कराया जाएगा वही जिन्हें चश्मे की जरूरत होगी उन्हें कम मूल्य पर चश्मा उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वाहन चलाने के दौरान उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी ना हो.

जमशेदपुर,
झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने 10 दिसंबर को आयोजित मजदूर सम्मलेन के बिरसा चौक, साकची स्थित बिरसा मुंडा के मूर्ति के समक्ष प्रेस कांन्फ्रेंस संपन्न हुआ. प्रेस कांन्फ्रेंस के माध्यम से कृष्णा लोहार और दीपक रंजीत ने कहाँ किया जनतांत्रिक महासभा मजदूरों के समस्या को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार शक्रिय है. चरणबद्ध आंदोलन का द्वारा जारी है. टीएसडीपीएल कंपनी में हुड़का जाम कार्यक्रम करने के बाद भी कम्पनीन्ने अभी तक कंपनी ने कितने लोगों का बहाली किया उसका सूची नहीं दिया. कितने स्थानीय लोगों को परमानेंट किया उसका सूची नहीं दिया. जो लोग गलत तरीके से स्थानीय नीति प्रमाण पत्र बनाया है उसका जाँच नहीं करवाया. 15 सालों के काम कर रहे झारखंडी मजदूरों को परमानेंट नहीं कर दो तीन साल पहले बिहार यूपी से काम करने आए मजदूरों को परमानेंट कर दिया जा रहा है. इन्ही सब समस्या को दूर करने के लिए. झारखंडी मजदूरों को 40 हजार तक के नौकरी में प्रथमिकता के कानून बनाया. लेकिन टाटा कंपनी के कुछ अधिकारी और यूनियन के गठजोड़ से अन्य राज्यों से काम करने आए मजदूरों को टीएसडीपीएल कंपनी में परमानेंट कर झारखंड सरकार के कानून का अवहेलना किया जा रहा है. इसके खिलाफ आगे का रणनीति बनाने के लिए 10 दिसंबर को आयोजित मजदूर संसद में चर्चा किया जाएगा.

साथ ही डिमना क्षेत्र में लगभग 35 कंपनी है. जो स्थानीय मजदूरों को 75% प्रथमिकता कानून के दायरे के अंतर्गत आता है. लेकिन सिर्फ 3 कंपनियों ने अपना डेटा कार्यालय में सब्मिट किया है. और जो डेटा दिया है व भी काफ़ी पुराना है. त्रिवेणी जैसे कंपनी में 2-3 साल काम करने के बाद भी वहा के कई मजदूरों का पीएफ इएसआई कार्ड तक नहीं बना है. और नेशनल हाइवे स्थित बाकि 33 कंपनियों ने तो अभी तक कोई डेटा ही जमा नहीं करवाया है. स्थानीय मजदूरों को प्रथमिकता कानून का खुल्लम खुल्ला अवहेलना किया जा रहा है. इन्ही सब मुद्दों को लेकर 10 दिसंबर को आयोजित मजदूर संसद में चर्चा किया जाएगा.

प्रेस कांन्फ्रेंस में मुख्य रूप से कृष्णा लोहार, अजित तिर्की, दीपक रंजीत, बीरेंद्र कुमार, सुनील हेब्रम, सोमनाथ मुख़र्जी, सागर पाल, घशीराम सिंह आदि लोग उपस्थित थे.

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