जमशेदपुर के अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के कारगुजारियों का परत दर परत खुलासा होने लगा है।

जमशेदपुर के अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के कारगुजारियों का परत दर परत खुलासा होने लगा है. वैसे इसका खुलासा तब हो रहा है जब बच्चे फेल हो रहे हैं. आरोप लग रहे हैं कि उन बच्चों को फेल किया जा रहा है जो स्कूल के टीचरों से ट्यूशन नहीं लेते हैं. इतना ही नहीं बच्चों के अभिभावक यह भी आरोप लगा रहे हैं कि उनके बच्चों के एडमिशन के वक्त डेढ़ से दो लाख का डोनेशन लिया गया है. कदमा स्थित डीबीएमएस स्कूल के कक्षा नौवीं और ग्यारहवीं के बच्चों को फेल किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. सोमवार को जिला प्रशासन की मौजूदगी में त्रिस्तरीय वार्ता बुलाई गई थी. जिसमें बच्चों के अभिभावक, स्कूल प्रबंधन एवं खुद एसडीओ पारुल सिंह मौजूद रही. यहां अभिभावकों ने बच्चों के री टेस्ट लिए जाने की मांग की. साथ ही बैठक के दौरान इसका भी खुलासा हुआ कि बच्चों के अभिभावकों से भारी- भरकम डोनेशन लेकर उनका एडमिशन लिया गया. और वैसे बच्चे जिन्होंने स्कूल के टीचर से ट्यूशन नहीं लिया उन्हें फेल कर दिया गया. इस मामले को लेकर जमशेदपुर अभिभावक संघ ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करने की मांग की है. संघ के अध्यक्ष डॉ उमेश कुमार ने बताया कि जमशेदपुर में शिक्षा के नाम पर एक सिंडिकेट काम कर रहा है, जिसपर अंकुश लगाने की जरूरत है. वहीं एसडीएम पारुल सिंह बताया कि पूरे मामले को लेकर उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए गए हैं. मामला चाहे जो भी हो इस प्रकरण ने साफ कर दिया है कि जमशेदपुर में निजी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन के आड़ में गोरख धंधे का खेल चल रहा है

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