झारखंड में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने और पत्रकारों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने सहित 9 सूत्री मांगों को लेकर मांग पत्र सौंपा गया

चाईबासा : झारखंड में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने और पत्रकारों को स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने सहित 9 सूत्री मांगों को लेकर सिंहभूम जर्नलिस्ट एसोसिएशन की ओर से झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर को मांग पत्र सौंपा गया। एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष गौरी शंकर झा और महासचिव राजेश पति ने मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर को ज्ञापन सौंपते हुए पत्रकारों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने का आग्रह किया। एसोसिएशन की मांगों को सुनने के बाद मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि हमारी सरकार एसोसिएशन की मांगों से सहमत है और हमें पूरी उम्मीद है कि हमारे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पत्रकारों के हित में कोई बड़ा निर्णय लेंगे। पहले भी 2013 में मुख्यमंत्री रहते हेमंत सोरेन ने पत्रकार हित में कई निर्णय लिया था, लेकिन बाद की सरकार ने उसे उलट दिया। मंत्री ने कहा कि हमारी सरकार पत्रकारों की सुरक्षा और अन्य मुद्दों पर गंभीर है और जल्द ही कुछ निर्णय लेगी। इस मौके पर झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स के कार्यकारी अध्यक्ष राजीव नयनम, सिंहभूम जर्नलिस्ट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, आनंद प्रियदर्शी, संतोष वर्मा, मानस घोष सहित अन्य पत्रकार मौजूद रहे।

सिंहभूम जर्नलिस्ट एसोसिएशन की मांग :-

1.राज्य में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू कराया जाए।

  1. पत्रकारों को आयुष्मान कार्ड सरीखे योजनाओं से जोड़ने या 5 लाख की स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ प्रदान किया जाए।
  2. पत्रकार उत्पीड़न की घटनाओं पर रोक लगाई जाए, इस पर अभिलंब कार्रवाई करने का निर्देश पुलिस को दिया जाए।
    4.पत्रकारों के खिलाफ होने वाले झूठे मुकदमों में तुरंत गिरफ्तारी की बजाए डीएसपी स्तर के अधिकारी से जांच के बाद ही दोषी पाए जाने पर कोई कार्रवाई की जाए।
  3. पत्रकारों के एक्रीडिटेशन की कार्रवाई में तेजी लाई जाए और इस कमेटी में झारखंड यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए।
  4. कोरोना काल में मृत पत्रकारों के परिजनों को सरकारी नौकरी और 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाए।
    7.विभिन्न दुर्घटनाओं में मृत पत्रकारों के परिजनों को 10 लाख रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।
  5. सरकार की लाभकारी योजनाओं से पत्रकारों को जोड़ा जाए।
  6. विकास योजनाओं और सरकार की योजनाओं में पारदर्शिता लाने के लिए विभिन्न स्तर पर बनने वाली सरकारी निगरानी समितियों में पत्रकारों को भी स्थान दिया जाए।

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