एक तरफ अस्पतालों में बेड उपलब्ध नही है, वहीं मरीजों को अस्पतालों तक पहुँचाने वाले एम्बुलेंस चालक भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं ।

देश और दुनिया समेत पुरा भारतवर्ष इन दिनों कोरोना के चपेट में है और रोजाना लाखों लाख लोग इसके संक्रमण के चपेट में आ रहे हैं , ऐसे में जहां एक तरफ अस्पतालों में बेड उपलब्ध नही है वहीं मरीजों को अस्पतालों तक पहुँचाने वाले एम्बुलेंस चालक भी खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं । जमशेदपुर शहर के टाटा मुख्य अस्पताल के पार्किंग में बड़ी संख्य में एम्बुलेंस खड़े होते हैं जहां के चालकों से हमने इस मुद्दे पर बातचीत की । एम्बुलेंस चालकों के अनुसार वे मरीज की सेवा में पूरे मुस्तैदी के साथ खड़े है लेकिन उनके लिए कोई भी नही खड़ा है ।

एक तरफ जहां एम्बुलेंस चालक संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा उठाते हुए मरीज़ों को अस्पताल पहुँचाने की ड्यूटी निभा रहे हैं वहीं सरकारी तंत्र के तरफ से इनके सुरक्षा के लिए कोई उपाय नही किया गया है , ऊपर से एम्बुलेंस का किराया भी पहले से ही निर्धारत है , यहां तक कि इन्हें पी.पी.इ किट भी उपलब्ध नही है , ऐसे में इन एम्बुलेंस चालकों को अब खुद के जीवन की चिंता सता रही है , सरकार के तरफ से इन्हें कोरोना वारियर्स भी घिषित नही किया गया जिससे कि इन्हें किसी प्रकार के सरकारी मदद मिल सकता था , अब सोचने वाली बात ये है कि जहां एक तरफ कोरोना संक्रमण अपने चरम सीमा पर है वहीं और सरकारी तंत्र को इन एम्बुलेंस चालकों पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है ।

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