
शहर में इन दिनों “PRESS” लिखी गाड़ियों की संख्या तेजी से बढ़ती नजर आ रही है। चिंता की बात यह है कि इन गाड़ियों में से कई ऐसे लोगों की हैं, जिनका पत्रकारिता या किसी भी मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थान से कोई संबंध नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ असामाजिक तत्व और प्रभावशाली लोग केवल दबदबा बनाने और नियमों से बचने के लिए अपनी गाड़ियों पर “PRESS” लिखवा रहे हैं। इतना ही नहीं, यह भी आरोप सामने आ रहा है कि कुछ बड़े व्यवसायी पैसे के बल पर फर्जी प्रेस कार्ड बनवाकर इस सुविधा का दुरुपयोग कर रहे हैं।
इस तरह की गतिविधियां न केवल पत्रकारिता की छवि को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि सुरक्षा के लिहाज से भी गंभीर खतरा बन सकती हैं। आशंका जताई जा रही है कि “PRESS” के नाम पर अपराधी तत्व बड़ी घटनाओं को अंजाम देकर आसानी से बच निकल सकते हैं।
ऐसे में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और जिला प्रशासन को इस मामले में तत्काल संज्ञान लेकर सख्त कदम उठाने की जरूरत है। केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थानों के अधिकृत प्रतिनिधियों को ही “PRESS” का उपयोग करने की अनुमति होनी चाहिए।
अवैध रूप से “PRESS” का इस्तेमाल करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करना अब समय की मांग बन गई है।
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